सेवासदन (उपन्यास) - प्रेमचंद(31जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)
प्रेमचंद की कालजयी उपन्यासों में से एक है सेवासदन.
प्रेमचंद की मनोविज्ञान के पंडित हैं.उनकी जादुई लेखनी का कोई जोर नहीं है.जब पाठक उनकी रचना पढते है तो खो जाता है.इतनी वास्तविक...... लगता है कहीं आस पास की ही घटना हो.
उनकी रचनाओं में हमारे समाज के दृष्टीकोण ,कुरुतीयों, व्यक्तिगत लिप्सा, खोखले आडंबरों, दिखावा का बेहद बारीकी से वर्णन है.सेवासदन में भी हम इस तरह की सच्चाई से रुबरु होंगे.भारतीय जन जीवन और समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं के प्रति जागरूक दृष्टिकोण ही उनके जनप्रिय होने का कारण है.
सेवासदन की कहानी शुरू होती है एक सरकारी मुलाजिम की कहानी से जिसकी दो बेटीयाँ और पत्नी है.उनका नाम कृष्णचन्द्र.कृष्णचन्द्र ने कभी घूस नहीं लिया लेकिन कभी पैसे भी नहीं बचाएं.जो कमाया वो मौज मस्ती में खर्च.लेकिन जब बेटीयों की शादी की बात आती है तो उन्हें घूस लेना पड़ता है.लेकिन वे घूसखोरी के नियमों से अनजान थे कि इसे मिल बांटकर खाना होता है और इन्हें जेल जाना पड़ता है.पुरा परिवार बिखर जाता है.... इनकी बेटीयाँ और पत्नी मैके चली जाती है लेकिन वहाँ भावज इन्हें चैन से रहने नहीं देती है.आखिकार बड़ी लड़की की शादी उसके मामा ने एक दो ब्याहे गरीब लडके से कर देतें हैं.
बड़ी लड़की सुमन गरीब घर में बहुत मुश्किल से गुजारा करती है.अच्छे खाने पीने की शौकीन सुमन को मन मार कर रहना पड़ता है.उसका पति गजानंद उसकी सुंदरता से डरता है.किसी तरह वैवाहिक गाड़ी आगे बढती है.इधर सुमन की दोस्ती बैरिस्टर की पत्नी सुभद्रा से हो जाती है.उसके घर सुमन का आना जाना गजानंद को पसंद नहीं है.एक रात नाच गाने देखने गई सुमन सुभद्रा के घर जहाँ उसे देर हो जाती है.इस बात पर उसका पति उसे घर से निकाल देता है
बाकी कहानी अगले भाग में 😊
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