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Showing posts from July, 2020

One night at call centre, by- Chetan Bhagat

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰🥰 सभी क्वालिस से' बार ' जातें हैं.थोडे रिलेक्स होने के बाद वे जब सेन्टर पर आने के लिए चलते हैं तो एक दुर्घटना हो जाती है. और गाड़ी एक बहुत बडे़ गढ्ढे में गिरने के कगार पर आ जाती है क्योंकि व्रुम ड्रिंक करके गाड़ी चला रहा था. सबको अपनी मौत सामने दिखाई देती है. सभी डर जातें हैं और इश्वर से प्रार्थना करते हैं कि अगर वे सुरक्षित बच गए तो इस नई जिंदगी में वे अपने सारे डर भुलाकर वे अपनी सारे ख्वाहिश पुरे करेंगे. और तभी उन्हें लगता है कि जैसे भगवान स्वयं काॅल किए और उन सभी को बचने के रास्ते बताएं......... सभी आश्चर्य में पड़ जातें हैं      आखिर सबने भगवान के बताए अनुसार कर बच जाते हैं. इस नए जीवन ने उन्हें गजब की हिम्मत भी मिलती है.सभी अपने जीवन में एक सही लक्ष्य तय करते हैं.पहले तो श्याम और व्रुम ने मिलकर सभी काॅल सेन्टर वर्कर की नौकरी बचाते है.वही वे बख्शी के भी सारे गलत मनसूबों पर पानी फेर देतें हैं.उनमें गजब का उत्साह आ जाता है.अब वे अपना व्यपार करने का निश्चय करते हैं.      वही ईशा माडलिंग का ख्याल निकाल देती है और स...

प्रेमाश्रम - उपन्यास, उपन्यासकार -प्रेमचंद (31जुलाई 1880- 8 अक्टूबर1936)

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प्रेमचंद के कलम से निकलने वाली एक बहुत ही सारगर्भित उपन्यास. वैसे तो प्रेमचंद की रचनाओं का सारांश लिखना असंभव काम है लेकिन फिर भी मैं यह प्रयास करती हूँ.    प्रेमाश्रम 1921 आई. उस समय किसान अंग्रेजों जमीदारों, ताल्लुकदारों, पटवारी, करिंदा के हाथों लुटे, खसोटे जातें थें. उनकी आजीवन मेहनत की कमाई को ये टैक्स, मालगुजारी, तहसीलदारी आदी कितने बहाने से ऊपर ही ऊपर छीन लेते थें और ये जो रात दिन, सुबह शाम, बारहों मास खुन पसीना बहाने बहाते थें वे दो वक्त की रोटी को भी तरसते थें. उसका विवरण हो या पति- पत्नी के रिश्ते की या यों कहें कि जीवन का वो कौन सा भाग हो भला उनकी लेखनी से अछुती हो...          प्रेमाश्रम की शुरुआत किसानों बात -चीत से शुरू होती है जिसमें वे जमींदारों से प्रताड़ना का दुखड़ा रोना रोते हैं. जहाँ उन्हें जमींदारों से अधिक न्यायप्रिय, परिश्रमी  अग्रेज लगतें हैं.जमींदारों की के तरह तरह से उन्हें नोचे जाने की भी चर्चा वे करते हैं. इनमें मनोहर, बासीत,आदिल, सखुआ,मुन्ना आदी किसान हैं.       यह कहानी बनारस के पास के लखनपुर ...

One night at call centre, Chetan Bhagat (22april 1974)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी ☺😊☁🌈 राधिका किसी तरह खुद को खुद को संभालति है.फिर सभी अपने अपने काॅल अटैंड करने लगते हैं. व्रुम को एक बतमीज अमेरिकी का काॅल आता है . व्रुम में ऐसे तो धैर्य की कमी है लेकिन वह फिर भी बहुत शांति से उसकी बकवास सुनता है और एक्सप्लेन करता है.लेकिन अमेरिकी उसे बहुत बुरा भला सुनता है और उसके भारतीय होने पर लानत देता है.अब व्रुम का धैर्य समाप्त हो जाता है.वह गुस्से में काॅल काट देता है.     इधर श्याम छुपकर प्रियंका और उसके होने वाले पति की बात दूसरे फोन पर सुनता है. और जब प्रियंका का होने वाला पति उसे प्यार से बात करता है तो श्याम यह सून कर जल- भून जाता है.और गुस्से में किसी से बात नहीं करता है.वही इन सबका बाॅस बक्शी इनकी सारी मेहनत का क्रेडिट खुद ले जाता है. और इनपर एक्सट्रा काम भी लाद देता है.और जब ये केबिन में आते हैं तो व्रुम गुस्से में लात मार कर माॅनीटर तोड़ देता है.इस पर ईशा को लगता है कि व्रुम ने मेरे कारण ऐसा किया. क्योंकि ईशा को व्रुम ने प्रपोज किया था लेकिन ईशा को अपना कैरियर बनाना है तो वह इंकार कर देती है.लेकिन व्रुम इसपर और ईशा ...

One night at call centre, by- Chetan Bhagat (22April 1974)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰🥰 श्याम को वो दिन याद आती हैं जब वह पहली बार प्रियंका श्याम के साथ डेट पर गई थी. प्रियंका जाने कौन कौन सी बातें कर रही थी लेकिन श्याम बस उसे देखें जा रहा था.उसकी छोटी नाक श्याम को बहुत पसंद थी. उसका जल्दी गुस्सा हो जाना सबकुछ श्याम को बेहद पसंद था.हाँ उसे ये बात अजीब लगतीं थी कि कैसे प्रियंका ईशा की इतनी शिकायत कर लेती है, कमीयां ढुढ़ लेती है लेकिन वही ं जब ये मिलती हैं तो जैसे सगी बहनें हो.      जब वे सेंटर पर पहुंचते हैं तो प्रियंका सब को बताती है कि उसकी शादी ठीक हो गई..... यह सुनकर श्याम अवाक् रह जाता है.ऐसा कैसे हो सकता है... वह प्रियंका को खुलकर बधाई भी नहीं देता है लेकिन वह पुरी बात जानना चाहता है.उसने प्रियंका के सामने का फोन हैक कर लेता है.और जब प्रियंका के मंगेतर का फोन आता है तो वह सब सुनता रहता है.सारे लोग इस बात से अनजान है. प्रियंका और गणेश (प्रियंका का मंगेतर) की बात सुनकर श्याम खौलता रहता है.    इधर ईशा कोने में बैठे खुद को जख्म देती है जिसे देख श्याम चकरा जाता है.उसके पुछने पर ईशा बताती है कि वह मा...

One night at call centre -in hindi (Chetan Bhagat(22 April 1974)

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चलिए अब हम पढते हैं चेतन की एक और किताब 🥰🥰    यह कहानी है बस एक रात की....और वह भी खुद चेतन सुनता एक रात ट्रेन के सफर में......तो है न मजेदार 😘😘     कहानी चेतन को एक औरत इस शर्त पर सुुुुुनाती है कि वह किताब का रुप दें.     कहानी के मुख्य पात्र हैं 6 लोग.3 मर्द और 3 औरत या लड़की.मिलिटरी अंकल, व्रुम, श्याम, प्रियंका, ईशा, राधिका.     कहानी श्याम बताता है और प्रियंका उसकी गर्लफ्रेंड रह चुकी है.वह आज भी उसे बहुत चाहता है.व्रुम खुले दिल का मस्त मौला नवजवान है.ईशा अपना फ्यूचर माडलिंग में बनाना चाहती है.राधिका शादीशुदा है और दिल्ली में अपने सास ससुर की देखभाल करते हुए जाॅब भी करती है, मिलिटरी अंकल बस अपने काम से काम रखने वाले इंसान हैं.ये सभी एक साथ काॅल सेंटर में काम करते हैं . इनकी शिफ्ट रात में ही होती है.        श्याम अपने खानदान में साधारण पोजीशन रखता है.जहाँ उसके सारे रिश्तेदार बडे़ बडे़ पोस्ट पर हैं वहीं वह एक काॅल सेंटर में काम करता है.इस बात को लेकर अधिकतर उसे व्यंग्य सुनने पडते है.इसलिए वह अपने रिश्तेदारों स...

गबन-4(अंतिम भाग) , प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰 रतन के पति की मृत्यु के बाद उसके जेठ का लड़का सारी जायदाद हडप लेता है.रतन को पति शोक में अन्य बातों का ध्यान ही नहीं रहा.उसे पति के समय का याद आता है.वो उसका कितना ख्याल रखतें थें.जालपा को जब इन बातों का पता चलता है तो वो रतन को अपने पास ले आती है.और रतन अब जालपा के साथ रहती है और उसके कलकत्ते चले जाने के बाद उसके सास ससुर का ख्याल रखती है.        इधर जालपा रमानाथ से मिलती तो है किसी तरह पुलिस से नज़र बचाकर लेकिन वह रमानाथ को खूब भला बुरा सुनाती है.कि क्यों वह झूठी गवाही के लिए तैयार हुआ? ऐसा जीवन पाकर क्या वह खुश हो सकेगा? जालपा उसे यह भी बता देती है कि उसपर "गबन" का कोई केस नहीं चल रहा है.वह झूठी गवाही से इंकार कर दें.....  रमानाथ भी इसकेे लिए तैयार हो जाता है लेकिन पुलिस ऐसा होने नहीं देती.उसे बहकाने के लिए सारे ऐशो आराम देता है, दिन भर शराब में डुबो ए रखतें हैं.एक वैश्या जोहरा को भी उसके लिए रखा जाता है ताकि उसका ध्यान पत्नी की तरफ नहीं जाए.....         जोहरा रमानाथ को हमेशा  बहलाएं रखत...

गबन (भाग 3) , प्रेमचंद (31 जुलाई 1880- 8 अक्टूबर 1936)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰🥰       रतन जो वकिल साहब की पत्नी थी उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं.वकील साहब क तबीयत बिगड़ी जाती है.रतन उन्हें लेकर कई डाक्टरों के चक्कर लगाती है.कई जगह जाती है.लेकिन उनकी हालत नही सुधरती.रतन को बहुत पछतावा होता है.वह अपने बर्ताव को लेकर दुखी होती है जो उसने वकील साहब के साथ किए.वह तो हमेशा मौज मस्ती में ही मगन रहती थी शायद ही कभी उसने पत्नी धर्म निभाया हो, उनका ध्यान भी नहीं रखती, कभी प्यार से पल दो पल साथ भी नहीं रहती...... अब जब वो छोड़ कर जाने वाले हैं तो उसे अपनी सारी गलती याद आती है.और एक सुबह वाकई वकील साहब चल बसे.रतन के पास रोने के सिवाय कुछ नहीं बचता...... अब उसके आंखों से सिर्फ गंगा- यमुना बहती रहती है.कितना महान परिवर्तन! वह जो मच्छर के डंक को सहन न करता, उसे अब चाहे मिट्टी तले तबा दो या जला दो... वो उफ् तक नहीं कहेगा.          इधर रमानाथ शतरंज की बाजी जीत जाता है.जीते पैसे से वह चाय की दुकान खोल लेता है.अब उसके जीवन में आराम है.जग्गो उसे बेटे की तरह प्यार करती है और देवीदीन की तो उसमें जान बस...

गबन- उपन्यास, उपन्यासकार- प्रेमचंद(31 जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

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🥰चलिए जानते हैं आगे की कहानी 😊 रमानाथ रात के समय गहने चोरी करके सोनार को लौटा देता है.जालपा खूब रोना धोना मचाती है.आखिरकार रमानाथ एक नौकरी कर लेता है.आमदनी तो कम रहती है पर ऊपरी आय बहुत है.यह बात जालपा घरवालों को बताने से मना करती है.अब जालपा खूब ऐश करती है.बाजार, सैर सपाटा, गहने, कपड़े..... .... धीरे धीरे उसने बहुत से गहने बनवा लिए.लेकिन वह अब भी चन्द्रहार के लिए दुखी है.रमानाथ ने बकाया लगाकर चन्द्रहार भी बनवा दिया.अब जालपा के पैर जमीन पर नहीं रहते हैं.   इसी बीच जालपा की दोस्ती एक अमीर वकील की पत्नी' रतन' से हो जाती है.रतन को जालपा के गहने बहुत पसंद आतें हैं.और वह वैसे गहने बनवा देने के लिए कहती है.रमानाथ तैयार हो जाता है लेकिन सोनार पैसे बकाए वाले में काट लेता है.और नए गहने के लिए पैसे मिलने पर ही देने को कहता है.रमानाथ मुशिबत में पड़ जाता है.उधर रतन गहने के लिए तकाजे करने लगती है.हडबडाहट में रमानाथ सरकारी पैसे सोनार को दे देता है और गहने ला कर रतन को दे देता है.जब ख्याल आता है तो सोनार लौटने से मना कर देता है.अब तो गबन का केस होना निश्चित! रमानाथ का दिमाग काम ...

गबन- उपन्यास, उपन्यासकार - प्रेमचंद(31 जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

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    मुंशी प्रेमचंद की विशाल खजाने में से एक है गबन.  जीवन की विषमताओं पर चोट करने और मानव मन की गहराइयों को कुरेद कर सामने लाने में तो मानों मुंशी जी को महारत हासिल थी.भारतीय जन जीवन और समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं के प्रति प्रगतिशील दृष्टिकोण ही उनकी रचनाओं के जनप्रिय होने का प्रमुख कारण है.      प्रस्तुत है उनके उपन्यासों की कड़ी में से एक चर्चित उपन्यास 'गबन'   मानवीय विवशता और उसके संबंधों की बेबाक बयानगी करती एक ह्रदयस्पर्शी गाथा!      कहानी शुरू होती है जालपा नामक एक लड़की के चन्द्र हार खरीदने की जीद के साथ.जालपा दीनदयाल की इकलौती संतान है.दीनदयाल जमींदार के मुख्तार हैं.उपरी आमदनी की बहार है.जालपा को कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं हुई है.लेकिन उसका झुकाव ं बचपन से ही गहनों के प्रति अधिक है.        वही दीनदयाल के पहचान वालों में दयानाथ नाम के एक सज्जन हैं जो कचहरी में नौकरी करते हैं.बहुत ईमानदार.उनका बड़ा लडका रमानाथ फैसनेबल है जो दीनदयाल को जालपा के लिए पसंद आ जाता है.बात चलती है.दयानाथ...

सेवासदन -प्रेमचंद (31जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

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       चलिए आगे जानते हैं.🥰शांता और सुमन जिस आश्रम में रहते हैं वहां जाने कैसे लोगों को भनक लग जाती है कि सुमन तवायफ थी... और आश्रम की औरतें आश्रम छोड़कर भागने लगती हैं जबकि सुमन एकदम बदल चुकी है.सबकी सेवा करती है.जिससे सुमन और शांत परेशान हो जाती है.       इधर सदन यह सब बात जान जाता है कि शांता को उसके चाचा जी आश्रम में लाकर रखें हैं.अब वह परेशान हो जाता है.उसे अपनी जिम्मेदारी का एहसास होता है.और वह नाव का व्यपार करना शुरू कर देता है.आश्रम में सुमन अपना गुजारा नही होता देखकर शांता को मामा के घर पहुँचा कर खुद आत्महत्या करने की ठान लेती है.जब वे दोनों नदी किनारे नाव के लिए जाती है तो वहाँ सदन मिल जाता है.सदन उन्हें रोक लेता है और कहता है कि अब आप लोग मेरी जिम्मेदारी हैं.वह उन्हें चाचा के घर न ले जाकर नदी किनारे ही झोपडे में रखता है.वही नदी किनारे ही विवाह की बची हुई रस्में होती है लेकिन उसके चाचा पदम् सिंह शामिल नहीं होतें हैं.न ही परिवार का कोई सदस्य.       शांता प्रेम में मग्न रहती है और सुमन सारे घर के काम काज करती है.यही ...

सेवासदन- प्रेमचंद (31जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

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  चलिए जानते हैं आगे कि कहानी.सुमन सुभद्रा के घर जाती है और सारा हाल सुनाती है.सुभद्रा उसे अपने घर रख लेती है जब तक उसका पति उसे लेने न आए.       इधर गजानंद को वकील पंडित पदम् सिंह के बारे में गलत बातें फैलाता है जिसे सुनकर पदम् सिंह सुमन को अपने घर से निकाल देतें हैं.सुमन भटकती है तब उसे तवाएफ "भोली बाई" अपने घर बुला लेती है.अब सुमन भी नाच गाना करने लगती है.       इधर वकील साहब का भतीजा " सदन " गाँव से शहर, उनके पास आता है.पदम साहब उसके पढाई की व्यवस्था कर देतें हैं.उसके सारे सुख सुविधा का ध्यान रखता है.इधर जब सुमन के पति को, सुमन के तवायफ बनने की खबर लगती है तो वह साधु बन जाता है.        पदम् सिंह के के दोस्त विठ्ठल दास सुमन को समझातें है कि वह ये गलत काम छोड़ दे.वही सदन जो पदम् सिंह का भतीजा है वह सुमन से प्रेम करने लगता है और सुमन भी.लेकिन वह विठ्ठल दास के समझाने पर ये काम छोड़ देती है और आश्रम में रहने लगती है.        सुमन की छोटी बहन शांता की शादी सदन से तय होती है.लेकिन शादी के ऐन समय लडके...

सेवासदन (उपन्यास) - प्रेमचंद(31जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

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    प्रेमचंद की कालजयी उपन्यासों में से एक है सेवासदन. प्रेमचंद की मनोविज्ञान के पंडित हैं.उनकी जादुई लेखनी का कोई जोर नहीं है.जब  पाठक उनकी रचना पढते है तो खो जाता है.इतनी वास्तविक...... लगता है कहीं आस पास की ही घटना हो.     उनकी रचनाओं में हमारे समाज के दृष्टीकोण ,कुरुतीयों, व्यक्तिगत लिप्सा, खोखले आडंबरों, दिखावा का बेहद बारीकी से वर्णन है.सेवासदन में भी हम इस तरह की सच्चाई से रुबरु होंगे.भारतीय जन जीवन और समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं के प्रति जागरूक दृष्टिकोण ही उनके जनप्रिय होने का कारण है.       सेवासदन की कहानी शुरू होती है एक सरकारी मुलाजिम की कहानी से जिसकी दो बेटीयाँ और पत्नी है.उनका नाम कृष्णचन्द्र.कृष्णचन्द्र ने कभी घूस नहीं लिया लेकिन कभी पैसे भी नहीं बचाएं.जो कमाया वो मौज मस्ती में खर्च.लेकिन जब बेटीयों की शादी की बात आती है तो उन्हें घूस लेना पड़ता है.लेकिन वे घूसखोरी के नियमों से अनजान थे कि इसे मिल बांटकर खाना होता है और इन्हें जेल जाना पड़ता है.पुरा परिवार बिखर जाता है.... इनकी बेटीयाँ और पत्नी मैके चली जाती ह...

One Indian Girl-3, by -Chetan Bhagat (22April, 1974)

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नील उसका केयर करता है, उसे प्रोत्साहित करता है.लेकिन जब राधिका कहती है कि कब तक हम ऐसे रहेंगे तो नील कहता है कि तुम्हे शादी करने की क्या जरूरत है.हम ऐसे ही खुश हैं.लेकिन जब राधिका कहती है कि नहीं वह ऐसे नहीं रह सकती.तो नील कहता है कि तुम शादी के लिए नहीं बनी.शादी वादी तुम्हारे लिए नहीं है.राधिका गुस्से में आ जाती है और नील को थप्पड़ जड़ देती है.राधिका रोने लगती है... वह एक बार और धोखा खाई महसूस करती है..... बिलकुल अकेली......       अब राधिका शादी के लिए मान गई है और अपने माँ के पसंद लडके से शादी के लिए तैयार हो जाती है.गोवा के एक शानदार होटल में उसकी शादी की रस्में होती है.शादी के दो दिन ही रह जाते जब वह अपने मंगेतर के साथ जाती है जहाँ वह मुशिबत में पडकर वह जेल में पहुंच जाते हैं.उसे अपने मंगेतर का नेचर अच्छा लगता है.ऐसे में उसके दोनों ब्वॉयफ्रेंड उसे ढुढते हुए बारी बारी से गोवा पहुँच जाते हैं.दोनों उसे खुद से शादी के लिए मनाते है और अपनी गलत सोच के लिए माफी मांगते है.राधिका परेशान हो जाती है... आखिरकार वह दोनों को उनकी छोटी सोच याद दिलाती और शादी के लिए ...

One Indian Girl -2, by- Chetan Bhagat (22 April 1974)

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आपने पिछले भाग में यह जाना कि राधिका देबू के साथ रिलेशनशिप में रहने लगती है.दोनों एक दूसरे का ख्याल रखते हैं लेकिन जैसे ही राधिका का प्रमोशन होता है देबू अपसेट हो जाता है यहाँ तक की उसके प्रमोशन पार्टी में भी नहीं जाता है.जिससे राधिका को बहुत बुरा लगता है.फिर भी वह सब मैनेज करती है.जब राधिका की माँ उससे शादी के दबाव बनाती हैं तो राधिका देबू से कहती है.इस पर देबू कहता है कि शादी के बाद राधिका को जाॅब छोडनी पडेगी तभी वह उससे शादी करेगा.यह सूनकर राधिका अवाक् रह जाती है.इस बात पर दोनों में बहस हो जाती है.दूसरे दिन राधिका देबू को मनाने के लिए सुबह उठकर उसके मनपसंद की डिस बनाती है.सब कुछ तैयार करने के बाद जब वह उसे जगाने जाती है तो वह उसे छोड़ कर जा चुका होता है.इस पर राधिका बहुत अकेला महसूस करती है वह देबू को बहुत मिस करती है.      आखिरकार राधिका फैसला करती है कि वह देबू को हर हाल में मनाएंगी.वह तैयार हो कर, बुके और उसके मनपसंद का चौकलेट , रिंग लेकर जाती है लेकिन वहाँ का नजारा देखकर वह सन्न रह जाती है.वहाँ देबू किसी और के साथ सेक्स करता रहता है.राधिका सब कुछ फेक कर...

One Indian girl-1 in Hindi, by- chetan bhagat (22 April 1974)

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उपन्यासकार-चेतन भगत     चेतन की यह उपन्यास भी आज के युवाओं का प्रतिनिधित्व करती है.यह एक भारतीय लड़की के नजदीक से हमें बताती है कि आज सपनों, कैरियर और फेमिनिज्म के क्या मायने हैं      कहानी शुरू होती है "राधिका" नाम की एक लड़की से जिसकी शादी अगले हफ्ते होने जा रही है.वह एक इंवेस्टमेंट बैंक गोल्डमान साक्स के लिए काम करती है.वह बहुत पैसे कमाती है.फिलहाल अपने शादी पर ध्यान देती है.इसी बीच उसके दो पुराने ब्वॉयफ्रेंड आ जाते हैं.दोनों उससे मिलना चाहते हैं.जब वह उनसे बारी बारी से मिलती है तो वे बताते हैं कि वे उससे शादी करना चाहते हैं.जहाँ सभी रिशतेदार आ चुके हैं शादी की सारी तैयारीयां हो चुकी हैं ऐसे में ये आकर राधिका को शादी तोडकर खुद से करने के लिए कहते हैं.       राधिका परेशान हो जाती है.उसे समझ नहीं आता कि वह क्या करें.उसका मंगेतर जब पुछता है तो वो नकार जाती है.वह अपने बीते कल में चली जाती है जहाँ से उसने नौकरी शुरू की थी.न्यूयॉर्क जहाँ से उसने जाॅब शुरू की थी.वही उसे देबू मिला था उसका पहला प्यार.शुरू शुरू में राधिका शर्मिली थी अपने आप में रहने...