गबन- उपन्यास, उपन्यासकार- प्रेमचंद(31 जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

🥰चलिए जानते हैं आगे की कहानी 😊

रमानाथ रात के समय गहने चोरी करके सोनार को लौटा देता है.जालपा खूब रोना धोना मचाती है.आखिरकार रमानाथ एक नौकरी कर लेता है.आमदनी तो कम रहती है पर ऊपरी आय बहुत है.यह बात जालपा घरवालों को बताने से मना करती है.अब जालपा खूब ऐश करती है.बाजार, सैर सपाटा, गहने, कपड़े..... .... धीरे धीरे उसने बहुत से गहने बनवा लिए.लेकिन वह अब भी चन्द्रहार के लिए दुखी है.रमानाथ ने बकाया लगाकर चन्द्रहार भी बनवा दिया.अब जालपा के पैर जमीन पर नहीं रहते हैं.
  इसी बीच जालपा की दोस्ती एक अमीर वकील की पत्नी' रतन' से हो जाती है.रतन को जालपा के गहने बहुत पसंद आतें हैं.और वह वैसे गहने बनवा देने के लिए कहती है.रमानाथ तैयार हो जाता है लेकिन सोनार पैसे बकाए वाले में काट लेता है.और नए गहने के लिए पैसे मिलने पर ही देने को कहता है.रमानाथ मुशिबत में पड़ जाता है.उधर रतन गहने के लिए तकाजे करने लगती है.हडबडाहट में रमानाथ सरकारी पैसे सोनार को दे देता है और गहने ला कर रतन को दे देता है.जब ख्याल आता है तो सोनार लौटने से मना कर देता है.अब तो गबन का केस होना निश्चित! रमानाथ का दिमाग काम करना बंद कर देता है.कैसे इस समस्या से निकले?? 
     आखिरकार रमानाथ घर छोड़ देने का फैसला लेता है.इधर घर वाले उसका इंतजार करते हैं.हार कर जालपा कार्यालय जाती है जहाँ पैसों की बात पता चलती है.वह तुरंत अपने गहने बेचकर पैसे लौटा देती है.लेकिन रमानाथ का कहीं अता- पता नहीं.अब यह निश्चित हो जाता है कि रमानाथ घर छोड़कर चला गया.घर में कोहराम मच जाता है.सभी घर वाले जालपा को दोषी ठहराते हैं.जालपा का रो रो कर बुरा हाल हो जाता है.ऐसे में सिर्फ रतन उसका सहारा बनती है. उसे बहलाती है.
      रमानाथ कलकत्ता पहुंच जाता है और खुद को ब्राह्मण बताकर एक कोयरी के घर में रहने लगता है.कोयरी परिवार में दो ही जन है एक बुढा' देवीदीन' और दूसरी उसकी पत्नी जग्गो.देवीदीन मस्तमौला आदमी है.उसकी रमानाथ से खूब पटती है.लेकिन जग्गो को रमानाथ का मुफ्त में अपने घर पडा़ रहना नहीं सुहाता.वह उसे खरी खोटी सुनाते रहतीं है.रमानाथ सब कुछ समझते हुए भी कायरों की भातिं अनसुना कर देता है क्योंकि दूसरा गुजारा नही है.एक दिन बातों ही बातों में बुढियाँ अपनी कहानी उसे बताती है.कैसे उसके दो बेटे देश के लिए बलिदान हो गए, भरी जवानी में.रमानाथ विह्वल होकर उसे माँ कहता है तो बुढियाँ जग्गो निहाल हो जाती है.अब दोनों में माँ बेटे का रिश्ता हो जाता है
    इधर जालपा रमानाथ की याद में घुलता रहती है.तभी उसके दिमाग में एक उपाय आता है.वह एक शतरंज का नक्शा अखबार में छपवाने का उपाय सोचती है.रमानाथ को शतरंज बहुत पसंद था.वह उस पर इनाम के रकम भी रखवा देतीं हैं कि कहीं नजर पडने पर रमानाथ इसे हल कर दे तो, रमानाथ का पता चल जाएगा.बाकी कहानी अगले भाग में 🥰🥰

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