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One night at call centre, by- Chetan Bhagat

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰🥰 सभी क्वालिस से' बार ' जातें हैं.थोडे रिलेक्स होने के बाद वे जब सेन्टर पर आने के लिए चलते हैं तो एक दुर्घटना हो जाती है. और गाड़ी एक बहुत बडे़ गढ्ढे में गिरने के कगार पर आ जाती है क्योंकि व्रुम ड्रिंक करके गाड़ी चला रहा था. सबको अपनी मौत सामने दिखाई देती है. सभी डर जातें हैं और इश्वर से प्रार्थना करते हैं कि अगर वे सुरक्षित बच गए तो इस नई जिंदगी में वे अपने सारे डर भुलाकर वे अपनी सारे ख्वाहिश पुरे करेंगे. और तभी उन्हें लगता है कि जैसे भगवान स्वयं काॅल किए और उन सभी को बचने के रास्ते बताएं......... सभी आश्चर्य में पड़ जातें हैं      आखिर सबने भगवान के बताए अनुसार कर बच जाते हैं. इस नए जीवन ने उन्हें गजब की हिम्मत भी मिलती है.सभी अपने जीवन में एक सही लक्ष्य तय करते हैं.पहले तो श्याम और व्रुम ने मिलकर सभी काॅल सेन्टर वर्कर की नौकरी बचाते है.वही वे बख्शी के भी सारे गलत मनसूबों पर पानी फेर देतें हैं.उनमें गजब का उत्साह आ जाता है.अब वे अपना व्यपार करने का निश्चय करते हैं.      वही ईशा माडलिंग का ख्याल निकाल देती है और स...

प्रेमाश्रम - उपन्यास, उपन्यासकार -प्रेमचंद (31जुलाई 1880- 8 अक्टूबर1936)

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प्रेमचंद के कलम से निकलने वाली एक बहुत ही सारगर्भित उपन्यास. वैसे तो प्रेमचंद की रचनाओं का सारांश लिखना असंभव काम है लेकिन फिर भी मैं यह प्रयास करती हूँ.    प्रेमाश्रम 1921 आई. उस समय किसान अंग्रेजों जमीदारों, ताल्लुकदारों, पटवारी, करिंदा के हाथों लुटे, खसोटे जातें थें. उनकी आजीवन मेहनत की कमाई को ये टैक्स, मालगुजारी, तहसीलदारी आदी कितने बहाने से ऊपर ही ऊपर छीन लेते थें और ये जो रात दिन, सुबह शाम, बारहों मास खुन पसीना बहाने बहाते थें वे दो वक्त की रोटी को भी तरसते थें. उसका विवरण हो या पति- पत्नी के रिश्ते की या यों कहें कि जीवन का वो कौन सा भाग हो भला उनकी लेखनी से अछुती हो...          प्रेमाश्रम की शुरुआत किसानों बात -चीत से शुरू होती है जिसमें वे जमींदारों से प्रताड़ना का दुखड़ा रोना रोते हैं. जहाँ उन्हें जमींदारों से अधिक न्यायप्रिय, परिश्रमी  अग्रेज लगतें हैं.जमींदारों की के तरह तरह से उन्हें नोचे जाने की भी चर्चा वे करते हैं. इनमें मनोहर, बासीत,आदिल, सखुआ,मुन्ना आदी किसान हैं.       यह कहानी बनारस के पास के लखनपुर ...

One night at call centre, Chetan Bhagat (22april 1974)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी ☺😊☁🌈 राधिका किसी तरह खुद को खुद को संभालति है.फिर सभी अपने अपने काॅल अटैंड करने लगते हैं. व्रुम को एक बतमीज अमेरिकी का काॅल आता है . व्रुम में ऐसे तो धैर्य की कमी है लेकिन वह फिर भी बहुत शांति से उसकी बकवास सुनता है और एक्सप्लेन करता है.लेकिन अमेरिकी उसे बहुत बुरा भला सुनता है और उसके भारतीय होने पर लानत देता है.अब व्रुम का धैर्य समाप्त हो जाता है.वह गुस्से में काॅल काट देता है.     इधर श्याम छुपकर प्रियंका और उसके होने वाले पति की बात दूसरे फोन पर सुनता है. और जब प्रियंका का होने वाला पति उसे प्यार से बात करता है तो श्याम यह सून कर जल- भून जाता है.और गुस्से में किसी से बात नहीं करता है.वही इन सबका बाॅस बक्शी इनकी सारी मेहनत का क्रेडिट खुद ले जाता है. और इनपर एक्सट्रा काम भी लाद देता है.और जब ये केबिन में आते हैं तो व्रुम गुस्से में लात मार कर माॅनीटर तोड़ देता है.इस पर ईशा को लगता है कि व्रुम ने मेरे कारण ऐसा किया. क्योंकि ईशा को व्रुम ने प्रपोज किया था लेकिन ईशा को अपना कैरियर बनाना है तो वह इंकार कर देती है.लेकिन व्रुम इसपर और ईशा ...

One night at call centre, by- Chetan Bhagat (22April 1974)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰🥰 श्याम को वो दिन याद आती हैं जब वह पहली बार प्रियंका श्याम के साथ डेट पर गई थी. प्रियंका जाने कौन कौन सी बातें कर रही थी लेकिन श्याम बस उसे देखें जा रहा था.उसकी छोटी नाक श्याम को बहुत पसंद थी. उसका जल्दी गुस्सा हो जाना सबकुछ श्याम को बेहद पसंद था.हाँ उसे ये बात अजीब लगतीं थी कि कैसे प्रियंका ईशा की इतनी शिकायत कर लेती है, कमीयां ढुढ़ लेती है लेकिन वही ं जब ये मिलती हैं तो जैसे सगी बहनें हो.      जब वे सेंटर पर पहुंचते हैं तो प्रियंका सब को बताती है कि उसकी शादी ठीक हो गई..... यह सुनकर श्याम अवाक् रह जाता है.ऐसा कैसे हो सकता है... वह प्रियंका को खुलकर बधाई भी नहीं देता है लेकिन वह पुरी बात जानना चाहता है.उसने प्रियंका के सामने का फोन हैक कर लेता है.और जब प्रियंका के मंगेतर का फोन आता है तो वह सब सुनता रहता है.सारे लोग इस बात से अनजान है. प्रियंका और गणेश (प्रियंका का मंगेतर) की बात सुनकर श्याम खौलता रहता है.    इधर ईशा कोने में बैठे खुद को जख्म देती है जिसे देख श्याम चकरा जाता है.उसके पुछने पर ईशा बताती है कि वह मा...

One night at call centre -in hindi (Chetan Bhagat(22 April 1974)

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चलिए अब हम पढते हैं चेतन की एक और किताब 🥰🥰    यह कहानी है बस एक रात की....और वह भी खुद चेतन सुनता एक रात ट्रेन के सफर में......तो है न मजेदार 😘😘     कहानी चेतन को एक औरत इस शर्त पर सुुुुुनाती है कि वह किताब का रुप दें.     कहानी के मुख्य पात्र हैं 6 लोग.3 मर्द और 3 औरत या लड़की.मिलिटरी अंकल, व्रुम, श्याम, प्रियंका, ईशा, राधिका.     कहानी श्याम बताता है और प्रियंका उसकी गर्लफ्रेंड रह चुकी है.वह आज भी उसे बहुत चाहता है.व्रुम खुले दिल का मस्त मौला नवजवान है.ईशा अपना फ्यूचर माडलिंग में बनाना चाहती है.राधिका शादीशुदा है और दिल्ली में अपने सास ससुर की देखभाल करते हुए जाॅब भी करती है, मिलिटरी अंकल बस अपने काम से काम रखने वाले इंसान हैं.ये सभी एक साथ काॅल सेंटर में काम करते हैं . इनकी शिफ्ट रात में ही होती है.        श्याम अपने खानदान में साधारण पोजीशन रखता है.जहाँ उसके सारे रिश्तेदार बडे़ बडे़ पोस्ट पर हैं वहीं वह एक काॅल सेंटर में काम करता है.इस बात को लेकर अधिकतर उसे व्यंग्य सुनने पडते है.इसलिए वह अपने रिश्तेदारों स...

गबन-4(अंतिम भाग) , प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰 रतन के पति की मृत्यु के बाद उसके जेठ का लड़का सारी जायदाद हडप लेता है.रतन को पति शोक में अन्य बातों का ध्यान ही नहीं रहा.उसे पति के समय का याद आता है.वो उसका कितना ख्याल रखतें थें.जालपा को जब इन बातों का पता चलता है तो वो रतन को अपने पास ले आती है.और रतन अब जालपा के साथ रहती है और उसके कलकत्ते चले जाने के बाद उसके सास ससुर का ख्याल रखती है.        इधर जालपा रमानाथ से मिलती तो है किसी तरह पुलिस से नज़र बचाकर लेकिन वह रमानाथ को खूब भला बुरा सुनाती है.कि क्यों वह झूठी गवाही के लिए तैयार हुआ? ऐसा जीवन पाकर क्या वह खुश हो सकेगा? जालपा उसे यह भी बता देती है कि उसपर "गबन" का कोई केस नहीं चल रहा है.वह झूठी गवाही से इंकार कर दें.....  रमानाथ भी इसकेे लिए तैयार हो जाता है लेकिन पुलिस ऐसा होने नहीं देती.उसे बहकाने के लिए सारे ऐशो आराम देता है, दिन भर शराब में डुबो ए रखतें हैं.एक वैश्या जोहरा को भी उसके लिए रखा जाता है ताकि उसका ध्यान पत्नी की तरफ नहीं जाए.....         जोहरा रमानाथ को हमेशा  बहलाएं रखत...

गबन (भाग 3) , प्रेमचंद (31 जुलाई 1880- 8 अक्टूबर 1936)

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चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰🥰       रतन जो वकिल साहब की पत्नी थी उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं.वकील साहब क तबीयत बिगड़ी जाती है.रतन उन्हें लेकर कई डाक्टरों के चक्कर लगाती है.कई जगह जाती है.लेकिन उनकी हालत नही सुधरती.रतन को बहुत पछतावा होता है.वह अपने बर्ताव को लेकर दुखी होती है जो उसने वकील साहब के साथ किए.वह तो हमेशा मौज मस्ती में ही मगन रहती थी शायद ही कभी उसने पत्नी धर्म निभाया हो, उनका ध्यान भी नहीं रखती, कभी प्यार से पल दो पल साथ भी नहीं रहती...... अब जब वो छोड़ कर जाने वाले हैं तो उसे अपनी सारी गलती याद आती है.और एक सुबह वाकई वकील साहब चल बसे.रतन के पास रोने के सिवाय कुछ नहीं बचता...... अब उसके आंखों से सिर्फ गंगा- यमुना बहती रहती है.कितना महान परिवर्तन! वह जो मच्छर के डंक को सहन न करता, उसे अब चाहे मिट्टी तले तबा दो या जला दो... वो उफ् तक नहीं कहेगा.          इधर रमानाथ शतरंज की बाजी जीत जाता है.जीते पैसे से वह चाय की दुकान खोल लेता है.अब उसके जीवन में आराम है.जग्गो उसे बेटे की तरह प्यार करती है और देवीदीन की तो उसमें जान बस...