गबन-4(अंतिम भाग) , प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936)

चलिए जानते हैं आगे की कहानी 🥰
रतन के पति की मृत्यु के बाद उसके जेठ का लड़का सारी जायदाद हडप लेता है.रतन को पति शोक में अन्य बातों का ध्यान ही नहीं रहा.उसे पति के समय का याद आता है.वो उसका कितना ख्याल रखतें थें.जालपा को जब इन बातों का पता चलता है तो वो रतन को अपने पास ले आती है.और रतन अब जालपा के साथ रहती है और उसके कलकत्ते चले जाने के बाद उसके सास ससुर का ख्याल रखती है.
       इधर जालपा रमानाथ से मिलती तो है किसी तरह पुलिस से नज़र बचाकर लेकिन वह रमानाथ को खूब भला बुरा सुनाती है.कि क्यों वह झूठी गवाही के लिए तैयार हुआ? ऐसा जीवन पाकर क्या वह खुश हो सकेगा? जालपा उसे यह भी बता देती है कि उसपर "गबन" का कोई केस नहीं चल रहा है.वह झूठी गवाही से इंकार कर दें.....  रमानाथ भी इसकेे लिए तैयार हो जाता है लेकिन पुलिस ऐसा होने नहीं देती.उसे बहकाने के लिए सारे ऐशो आराम देता है, दिन भर शराब में डुबो ए रखतें हैं.एक वैश्या जोहरा को भी उसके लिए रखा जाता है ताकि उसका ध्यान पत्नी की तरफ नहीं जाए..... 
       जोहरा रमानाथ को हमेशा  बहलाएं रखती है.रमानाथ भी सब कुछ भुल कर जोहरा से प्यार करने लगता है.वह उन वादों को भी भुल जाता है जो वह जालपा से किए थें.दिनभर शराब में डुबा रहता है.पैसों की भी कोई कमी नहीं होती है.मोटर गाड़ी सब उसके लिए तैयार रहता है.एक दिन वह सोने के कंगन लेकर जग्गो को देने जाता है तब जालपा उसे खूब खरी खोटी सुनाती है.जालपा उस क्रांतिकारी के घर जाती है जिसको फांसी लगने वाली थी, रमानाथ के गलत बयान के वजह से.जालपा पति के पापों का पश्चाताप करती है वह वहाँ जाकर उनकी सेवा करती है, उनके लिए पैसे इक्कठे करती है, उसके पुरे घर को संभालती है.
         एक बार मोटर गाड़ी में घुमते समय उसे जालपा दिख जाती है जो सर पर पानी कलशा लिए चली जा रही थी.वह पहचान में ही नहीं आती है बहुत कमजोर...बहुत गरीब सी...... रमानाथ का जमीर उसे धिक्कारता है लेकिन वह कुछ कर भी नहीं पाता है पुलिस के कारण.तब वह जोहरा को इस बात का पता लगाने के लिए भेजता है.और जब उसे सच्चाई पता चलती है तो उसके पैरों तले की जमीन खिसक जाती है.वह अपनी ही नजरों में गिरा हुआ महसूस करता है.आखिरकार वह मन ही मन गवाही बदल लेने को ठान लेता है.पुलिस के सामने हां हां तो करता है लेकिन गवाही के समय वह सच का साथ देता हैऔर सारा खेल बदल जाता है.पुलिस की सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है.जालपा, जग्गो, देवीदीन , जोहरा सभी बहुत खुश होते हैं और सभी एक साथ प्रयागराज आ जातें हैं.
        अब रमानाथ और सारे लोग एक साथ एक गाँव में रहते हैं.वही खेती बारी करते हैं.रमानाथ का साथ देवीदीन और दयानाथ देतें है.इधर घर के कामों को जोहरा, रतन, जालपा सभी करती है.जग्गो और रमानाथ की माँ बाहर का काम देखती हैं.जालपा के बच्चे हो जातें हैं तो वह उनमें भी व्यस्त रहती है और ऐसे में जालपा और रतन करीब आ जाती है ं.बहुत अच्छी सहेली बन जातीं हैं.रतन के बीमार पडने पर जोहरा सारी सारी रात जाग कर उसकी सेवा करती है.
     एक बार बाढ़ आई हुई रहती है.नदीयाँ उफान पर रहती हैं.उन्हें देखने के लिए जालपा और रतन साथ जाती है.तब न जाने कैसे रतन का पैर फिसल जाता है और वह पानी में बहने लगती है.सभी लोग चिल्लाने लगते हैं.पानी का बहाव बहुत तेज़ है.रमानाथ उसे बचाने के लिए पानी में खुदा जाना चाहता है लेकिन जालपा रोक लेती है.जोहरा भी उसे मना करती है.और खुद पानी में कुद जाती है.और पानी के बहावे में दोनों बह जाती है और देखने के सिवाय कोई चारा नहीं रहता.और कहानी यही समाप्त हो जाती है 🥰🥰

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