Posts

Showing posts from June, 2020

कर्मभूमि प्रेमचंद (अंतिम भाग )

अब तक आपने जाना कि अमरकांत घर छोड़ कर समाज सुधार कर रहा है.इधर सुखदा भी समाज सेवा में खुद को झोक देता है.नैना की शादी एक अमीर, बिगडैल से हो जाती है. जहाँ उसका जीवन नर्क हो जाताहै लेकिन फिर भी वह सब सहती है.     इधर सकीना अभी अमरकांत के नाम पर बैठी हुई है.उसके शादी के कितने ही रिश्ते आतें हैं लेकिन वह इन्कार कर देती.और ऐसे गहरा प्रेम देखकर सलीम सकीना से मुहब्बत करने लगता है.सलीम की नौकरी बडे ओहदे पर हो जाती है.वह सरकारी नौकर बन कर उसी इलाके में जाता है जहाँ अमरकांत है.सुखदा रात दिन, बारीस, धूप, लू सब होने के बावजूद भी गरीबों के लिए लडती रहती है और अब उसके वो ससुर, जो एक एक पैसों को दांतों से पकडते वो अपना सारा धन समाज की सेवा में लगा देते हैं          अमरकांत  पत्र  अपने शिक्षक शान्तिकुमार के पास भेजता है जो शान्तिकुमार सुखदा को पढ़ने के लिए देते हैं जिसे वह देखती भी नहीं है.सुखदा कहतीं है "क्या मैं यही काम करती तो क्या आप मुझे माफ करते ं..... नहीं आप मुझे माफ नहीं करते बल्कि जान से मार डालते........ "एक औरत की दुखी जज्बात देखकर शान्तिकुम...

कर्मभूमि प्रेमचंद(भाग -3)

आपने अब तक जाना कि अमरकांत विवाहित होने के बावजूद सकीना नाम की मुस्लिम स्त्री से प्यार करने लगता है.यह बात वह अपने दोस्त सलीम को बताता है.सलीम उसे समझात है कि ये सब गलत है.लेकिन अमरकांत नहीं मानता सलीम उसे अपनी गजल सुनाता है.      "यही दुनियाए उलफत में, हुआ करता है होने दो       तुम्हें हंसना मुबारक हो, कोई रोता है रोने दो."   "  कसम ले लो जो शिकवा हो तुम्हारी बेवफाई का      किए की अपने रोता हूँ मुझे जी भर के रोने दो."     एक दिन अमरकांत का अपने पिता के साथ बहस हो जाती है और वह घर छोड़ देता है. उसके साथ उसकी पत्नी सुखदा, उसका बच्चा भी घर छोड़ देते हैं तो बहन नैना भी साथ जाने के लिए रोने लगती.अब इन सब की जिम्मेदारी अमरकांत के कंधों पर आ जाती है.अमरकांत फेरी का काम करने लगता है.सुखदा एक विद्यालय में बढाने लगती है.लेकिन सुखदा को अमरकांत का फेरी का पसंद नहीं है.इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा होता है.अमरकांत सकीना से सारी बात कह कर अपना मन हल्का करता है इधर समरकांत एकले हैं.असुविधा के कारण समरकांत की तबियत खराब हो जाती है तो सु...

कर्मभूमि -प्रेमचंद (भाग -2)

आपने अब तक जाना कि अमरकांत विवाहित होने के बावजूद सकीना नाम की मुस्लिम स्त्री से प्यार करने लगता है.यह बात वह अपने दोस्त सलीम को बताता है.सलीम उसे समझात है कि ये सब गलत है.लेकिन अमरकांत नहीं मानता सलीम उसे अपनी गजल सुनाता है.      "यही दुनियाए उलफत में, हुआ करता है होने दो       तुम्हें हंसना मुबारक हो, कोई रोता है रोने दो."   "  कसम ले लो जो शिकवा हो तुम्हारी बेवफाई का      किए की अपने रोता हूँ मुझे जी भर के रोने दो."     एक दिन अमरकांत का अपने पिता के साथ बहस हो जाती है और वह घर छोड़ देता है. उसके साथ उसकी पत्नी सुखदा, उसका बच्चा भी घर छोड़ देते हैं तो बहन नैना भी साथ जाने के लिए रोने लगती.अब इन सब की जिम्मेदारी अमरकांत के कंधों पर आ जाती है.अमरकांत फेरी का काम करने लगता है.सुखदा एक विद्यालय में बढाने लगती है.लेकिन सुखदा को अमरकांत का फेरी का पसंद नहीं है.इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा होता है.अमरकांत सकीना से सारी बात कह कर अपना मन हल्का करता है इधर समरकांत एकले हैं.असुविधा के कारण समरकांत की तबियत खराब हो जाती है तो सु...

कर्मभूमि - प्रेम चंद-1

  कलम के जादूगर प्रेम चंद जी की कालजयी रचनाओं में से एक है 'कर्मभूमि'. इस उपन्यास में प्रेम पर बहुत विस्तार से लिखा है.बहुत रोमांटिक है यह उपन्यास... प्यार से सराबोर.लेकिन प्यार कब , कैसे परिस्थितियों के वश बदल जाता है यह भी बहुत खूब दर्शाया है इन्होंने.इसकी कहानी पाठक को अपने पास पडोस जैसी ही लगेगी. बचपन की जो चर्चा इन्होंने नायक द्वारा की है वह उनके अपने जीवन का ही भाग है.तो आईए ले चलुं रुहानी दुनिया में ☺             कहानी में मुख्य नायक अमरकांत है.उसका दोस्त सलीम, उसकी पत्नी सुखदा, बहन नैना, पिता समरकांत, प्रेमिका सकीना, शिक्षक शान्ति कुमार आदी कहानी के मुख्य पात्र हैं. कहानी अंग्रेजो के समय की है.     कहानी अमरकांत के विद्यालय से शुरू होती है.जहाँ उसके पास जमा करने के लिए रुपये नहीं है.तो वह बाहर जा कर छुपकर रोता है तब सलीम उसके पैसे जमा कर देता है.सलीम बहुत अच्छा शायर है और वह अपनी शायरी अमरकांत को सुनाता है और वह हमेशा वाहा वाही कर के उसका मनोबल बढाता है.      "आपको मेरी वफ़ा याद आयी,        खैर है...

रिवोल्यूशन-2 , लेखक- चेतन भगत (22 अप्रैल 1974)

Image
😊तो चलिए जानते हैं आगे की कहानी.      आरती को पाकर गोपाल बहुत खुश है.राघव से वह किसी काम से मिलने जाता है जहाँ राघव की स्थिति देखकर वह चकित रह जाता है.राघव पत्रकार है और साथ ही एक अच्छे , सम्मपन परिवार से भी है.लेकिन वह यहाँ एक छोटे से कमरे में बिना ए.सी गर्मी और उमस में गरीबों के लिए दिनरात मेहनत कर रहा है . यहाँ थोड़ी ही देर बैठने पर गोपाल गर्मी से बेहाल हो जाता है.वही राघव एक गरीब की समस्या सूनने में लगा है जिसके कारण राघव को इन्तजार करना पड़ता है.         गोपाल आगे बढ़ कर राघव और उस गरीब की बात सुनता है जो काफी कठिनाई में है.और राघव उसे न्याय दिलाने के लिए बिना पैसे के , बिना सुविधा के, उसके घर आने का वादा करता है तो वह गरीब रोने लगता है.यह सब देखकर गोपाल अपने बीते दिनों में चला जाता है.खुद को उस गरीब के जगह रख कर सोचने लगता है.तब उसे अपनी गलतीयो का अहसास होता है और वह तय कर लेता है कि वह राघव और आरती के बीच से हट जाएगा.         अब गोपाल एक तरकीब सोचता है.वह अपने जन्म दिन के दिन दो लडकीयों के साथ गलत स्तिथि में तब ...

रिवोल्यूशन 2020 by चेतन भगत (22 अप्रैल 1974)

Image
     चेतन भगत अंग्रेजी के जाने माने उपन्यासकार है ये तो आप सभी जानते हैं.उनकी रचना की खासियत प्यार, धोखा, सेक्स, व्यक्तिगत समस्याएं होती .आज के जमाने के युवा जिन्दगी को कैसे जीना चाहतें हैं जैसी समस्या मुख्य होती है है, तो आईए चलते हैं एक और प्रेम, धोखा, महत्वाकांक्षा की जबरदस्त कहानी को पढ़ने 😊.             कहानी शूरू होती है कहानी के मुख्य नायक गोपाल और उपन्यासकार चेतन भगत के बातचीत से.चेतन भगत जी किसी काम से बनारस आएं है जहाँ उनकी मुलाकात गोपाल नामक नवजवान से होती है.जो काफी लग्जरी लाइफ जीता है लेकिन बहुत दुखी है, खुद को हमेशा शराब के नशे में डुबाए रखता है.जब चेतन उससे बात करते हैं तो वह अपने आपको सजा देने की बात बताता है.कहानी फ्लैश बैक में चली जाती है है.       गोपाल और राघव दो दोस्त बनारस के एक अच्छे स्कूल में पढते हैं.गोपाल के पिता की आर्थिक स्थिति, शारीरिक ,स्थिति ठीक नहीं है.वे अक्सर बीमार रहते हैं.उसकी माँ की मृत्यु उसके बचपन में ही हो जाती है.लेकिन रा...

गोदान

    स्वागत है आपका.तो चलें हम "गोदान" के अंतिम भाग में😊 मालती और मेहता के प्रेम प्रसंग को तो आप जान ही गए जिसमें मालती मेहता से प्यार करती है और मेहता मालती से प्रेम का नाटक इसलिए करते हैं कि उन्होंने मिसेज खन्ना से वादा किए थे कि वो मालती को खन्ना से दूर कर देंगे.और मिसेज खन्ना का वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा.उन्होंने हमेशा मालती को परखा.और इधर मालती का वाकई में ह्रदय परिवर्तन हो जाता है . धीरे धीरे परिस्थिति बदल जाती है और अब मेहता मालती के लिए बेचैन रहते हैं.अब वो परिक्षक से परिक्षारथी बन जाते हैं.वह मालती से शादी के लिए बेचैन रहते हैं.अंतत:मालती उनसे कहती है कि" हम हमेशा एक है .हमारा प्यार सच्चाई , परख से परे है.लेकिन हम इस जो समाज के लिए अभी जितना कर रहे हैं अभी उतना शादी के बाद नहीं कर पाएंगे.अभी हम खुले हाथों समाज, गरीबों की जो सेवा कर रहे हैं वो शादी के बाद अपने ही खर्चो में खत्म हो जाएगा.हमारी सारी सोच परिवार तक ही सिमट जाएगी.इस तरह अलग रह कर हम एक दूसरे के ही रहेंगे और समाज की सेवा भी कर सकेंगे."        मेहता प्यार का ऐसा रुप देखकर मालती के गले लग क...

गोदान 2

    हाय, मैं आ गई गोदान को लेकर 😊तो चले जादूई लेखनी से रुबरु होने.   आपने पिछले अंक में देखा की किस तरह एक गरीब किसान रिती रिवाज, सामाजिक बेडियो में जाता हुउ पिसता रहता है.एक किसान जो पौ फटते ही काम पर लग जाता है और रात गए तक लगा रहता है उसे अन्य सुविधाओं तो छोडे दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती थी.और दूसरी ओर जमींदार और अंग्रेज अय्याशी भरी जिंदगी बिताते थें.इन सब के साथ ही महान कथाकार प्रेम चंद जी ने हर एक रिश्ते का बहुत ही खुबसूरती से वर्णन किया है.मनोदशा का इतना इतना सजीव चित्रण की कोई भी नि:शब्द रह जाए . मैं तो यह दावे के साथ कहती हूँ कि इतनी बेहतरीन मनोदशा का वर्णन कोई नहीं कर सकता.        गोबर शहर भागकर मिर्जा साहब के यहाँ काम करने लगता है.मिर्जा साहब मस्तमौला इन्सान हैं.वो अक्सर कुछ न कुछ नया करते रहते हैं.जैसे सभी बेरोजगार मजदूरों का कब्बडी का आयोजन.खेल का खेल और खेल के अंत में मजदूर भी.यही उनके दोस्त इक्कठे होतें है राय साहब, मेहता साहब, खन्ना, मालती, मिस्टर तंखा, संपादक ओंकरनाथ.यहाँ फिलसफर मेहता साहब के प्रति डाक्टर मालती आकर्षित है लेकि...

गोदान

गोदान  विश्व की महान कालजयी रचना है. इसे कम शब्दों में बांधना गागर में सागर भरने जैसा है.लेकिन फिर भी मैं आपको के लिए इससे करने की पुरी कोशिश करुंगी.      गोदान  मुलतः किसानों की कथा है.ये उस समय की बात है जब भारत गुलाम था और पुरा भारत जमींदार में बंटा था.ये जमींदार जबरदस्ती लगाने वसूल कर अंग्रेजो को भरते थें.उस समय किसानों की हालत बहुत दयनीय थी. दिन भर की देह तोड़ काम करने के बावजूद भी दो वक्त का खाना भी नहीं मिल पाता था. चारों तरफ विपन्नता का राज था.      गोदान के मुख्य पात्र क्रमशः होरी, गोबर, धनिया, झुनकी,मेहता साहब, मालती, खन्ना, राय बहादुर हैं. कहानी के मुख्य पात्र होरी सारी जिन्दगी पिसता रहता है. अपने घरवालों का पेट काट कर वो जमींदार रायबहादुर को लगाने देता है . लगाने भरने के बावजूद भी वह जमींदार का बे दाम का गुलाम है.ये बात उसकी पत्नी धनिया को नहीं पचती.लगान भरने के बावजूद भी जमींदार की गुलामी के खिलाफ वह अपने पति होरी से लडती है. परिवार के टुटने और बिखरने का इतना सजीव चित्रण आज तक किसी ने नहीं किया हो.           ...

अग्नि की उड़ान-2

  उन्हें नौकरी के क्रम में उन्हें कानपुर आना पडा़ था जो रामेश्वरम के शांत माहौल से एकदम विपरीत था. उन्हें सबसे अधिक मुश्किल 'आलू' को लेकर हुई जो उन्हें सुबह से रात तक खाने को मिलता.लोगों को रोजगार के लिए भटकते देखकर उन्हें काफी दुख होता था.    उनकी पहली पसंद पायलट बनना था जो कि उनकी शारीरिक योग्यता के कारण नहीं हुई. इससे दुखी होकर वें ऋषिकेश जाकर गंगा स्नान किए और महात्मा शिवानन्द से मिलें.उन्होंने अपनी पहली नौकरी 250 रुपए के वेतन पर वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक के पद की.लेकिन उन्हें हमेशा खुद को साबित करना पड़ा.            वे कार्यशाला में मस्जिद की तरह ही जूते उतार कर जातें थे ं.वे अपने काम के दौरान जब भी परेशान होते ं अपने बचपन में चले जाते ं.कलाम साहब अपने जीवन में सबसे अधिक डाक्टर विक्रम साराभाई से प्रभावित थें.साराभाई की जिदांदिली देखकर वे हमेशा दंग रह जाते ं.              भारतीयों के अहंकार को उनकी तरक्की का वे सबसे बाधक मानते थे कलाम साहब.वे कहा करते थे ं की सभी बुद्धिमान मनुष्य अप...

अग्नि की उड़ान -1

अग्नि की उड़ान महान व्यक्तित्व के धनी डॉ कलाम साहब की जीवनी है.कलाम साहब को कौन नहीं जानता लेकिन हम यहाँ उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को जानेगे.इस किताब को "अरुण कुमार तिवारी जी ने लिखा है.                         कलाम साहब का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम कस्बे में हुआ.बेहद ही साधारण परिवार में जन्मे कलाम साहब के पिता "जैनुलाबदीन"बहुत ही बुद्धि मान और सिद्धांत प्रिय इन्सान थे.माता "आशियम्मा" कुशल गृहणी, उदार, और दयालु प्रवृत्ति की थी ं.रामेश्वरम में धार्मिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं था.              कलाम साहब बचपन में पक्षीयों को उडता देखकर खुश हुआ करते.आसमान में उडना उनका सपना बन गया.बहुत सारे संघर्षों का सामना करते हुए वे रामेश्वरम से पढाई के लिए बाहर जाने वाले पहले व्यक्ति बने.स्कूली जीवन में फीस जमा करने के लिए उन्हें काम भी करना पड़ा.यहाँ तक की पैसों की तंगी के कारण उन्होंने शाकाहारी बनने का निश्चय किया.        एक बार तो उनके शिक्षक ने उन्हें सिर्फ इस बात के लिए बेंतो स...