कर्मभूमि प्रेमचंद (अंतिम भाग )
अब तक आपने जाना कि अमरकांत घर छोड़ कर समाज सुधार कर रहा है.इधर सुखदा भी समाज सेवा में खुद को झोक देता है.नैना की शादी एक अमीर, बिगडैल से हो जाती है. जहाँ उसका जीवन नर्क हो जाताहै लेकिन फिर भी वह सब सहती है. इधर सकीना अभी अमरकांत के नाम पर बैठी हुई है.उसके शादी के कितने ही रिश्ते आतें हैं लेकिन वह इन्कार कर देती.और ऐसे गहरा प्रेम देखकर सलीम सकीना से मुहब्बत करने लगता है.सलीम की नौकरी बडे ओहदे पर हो जाती है.वह सरकारी नौकर बन कर उसी इलाके में जाता है जहाँ अमरकांत है.सुखदा रात दिन, बारीस, धूप, लू सब होने के बावजूद भी गरीबों के लिए लडती रहती है और अब उसके वो ससुर, जो एक एक पैसों को दांतों से पकडते वो अपना सारा धन समाज की सेवा में लगा देते हैं अमरकांत पत्र अपने शिक्षक शान्तिकुमार के पास भेजता है जो शान्तिकुमार सुखदा को पढ़ने के लिए देते हैं जिसे वह देखती भी नहीं है.सुखदा कहतीं है "क्या मैं यही काम करती तो क्या आप मुझे माफ करते ं..... नहीं आप मुझे माफ नहीं करते बल्कि जान से मार डालते........ "एक औरत की दुखी जज्बात देखकर शान्तिकुम...