रिवोल्यूशन-2 , लेखक- चेतन भगत (22 अप्रैल 1974)

😊तो चलिए जानते हैं आगे की कहानी.
     आरती को पाकर गोपाल बहुत खुश है.राघव से वह किसी काम से मिलने जाता है जहाँ राघव की स्थिति देखकर वह चकित रह जाता है.राघव पत्रकार है और साथ ही एक अच्छे , सम्मपन परिवार से भी है.लेकिन वह यहाँ एक छोटे से कमरे में बिना ए.सी गर्मी और उमस में गरीबों के लिए दिनरात मेहनत कर रहा है . यहाँ थोड़ी ही देर बैठने पर गोपाल गर्मी से बेहाल हो जाता है.वही राघव एक गरीब की समस्या सूनने में लगा है जिसके कारण राघव को इन्तजार करना पड़ता है.
        गोपाल आगे बढ़ कर राघव और उस गरीब की बात सुनता है जो काफी कठिनाई में है.और राघव उसे न्याय दिलाने के लिए बिना पैसे के , बिना सुविधा के, उसके घर आने का वादा करता है तो वह गरीब रोने लगता है.यह सब देखकर गोपाल अपने बीते दिनों में चला जाता है.खुद को उस गरीब के जगह रख कर सोचने लगता है.तब उसे अपनी गलतीयो का अहसास होता है और वह तय कर लेता है कि वह राघव और आरती के बीच से हट जाएगा.
        अब गोपाल एक तरकीब सोचता है.वह अपने जन्म दिन के दिन दो लडकीयों के साथ गलत स्तिथि में तब रहने का दिखावा करता है जब आरती उससे मिलने आती है.ये सब देख, आरती रोती हुई वहाँ से भाग जाती है.अब गोपाल और आरती अलग हो चुकें हैं और आरती की शादी राघव से हो जाती है.उस दिन गोपाल खुब शराब पीता है और बहुत रोता है.
         अपनी कहानी चेतन भगत को बताकर राघव पुछता है कि क्या वह गलत है.चेतन उसे अच्छा इन्सान कहते हैं.सबसे अधिक दुख तब होता है जब गोपाल यह कहता है कि वह कभी आरती को भुल नहीं सकता....... वह मुझे हमेशा गलत इन्सान समझेगी....... 

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