गोदान
स्वागत है आपका.तो चलें हम "गोदान" के अंतिम भाग में😊
मालती और मेहता के प्रेम प्रसंग को तो आप जान ही गए जिसमें मालती मेहता से प्यार करती है और मेहता मालती से प्रेम का नाटक इसलिए करते हैं कि उन्होंने मिसेज खन्ना से वादा किए थे कि वो मालती को खन्ना से दूर कर देंगे.और मिसेज खन्ना का वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा.उन्होंने हमेशा मालती को परखा.और इधर मालती का वाकई में ह्रदय परिवर्तन हो जाता है . धीरे धीरे परिस्थिति बदल जाती है और अब मेहता मालती के लिए बेचैन रहते हैं.अब वो परिक्षक से परिक्षारथी बन जाते हैं.वह मालती से शादी के लिए बेचैन रहते हैं.अंतत:मालती उनसे कहती है कि" हम हमेशा एक है .हमारा प्यार सच्चाई , परख से परे है.लेकिन हम इस जो समाज के लिए अभी जितना कर रहे हैं अभी उतना शादी के बाद नहीं कर पाएंगे.अभी हम खुले हाथों समाज, गरीबों की जो सेवा कर रहे हैं वो शादी के बाद अपने ही खर्चो में खत्म हो जाएगा.हमारी सारी सोच परिवार तक ही सिमट जाएगी.इस तरह अलग रह कर हम एक दूसरे के ही रहेंगे और समाज की सेवा भी कर सकेंगे."
मेहता प्यार का ऐसा रुप देखकर मालती के गले लग कर रोने लगते ं हैं.इधर खन्ना की मिल में आग लग जाता है और वह बीमार हो जातें हैं तब उनकी पत्नी सभी पुरानी बातों को भुलकर उनकी सेवा करती है और इस दुख, तकलीफ को भी एक नए नजरीए से उन्हें देखने को कहती है."कि आप जो दिन भर हलकान हुए रहते थे, बच्चों से ढंग से बात भी नहीं कर पाते थें, घर से बिलकुल कट कर रह गए थें वो अब नहीं है.पैसे कम ही सही लेकिन घर तो घर लगने लगा.हम एक साथ बैठकर हंस बोल तो सकते हैं और यहे जीवन है "
जमींदार रायबहादुर के सारे मंसूबे खाक में मिल जातें हैं.बेटी और दमाद में नहीं पटती, बेटा बाप के खिलाफ हो जाता है.अथाह धन संम्पति के बावजूद भी उनके जीवन में खुशीयों का नामों निशान नही है.
गाँव में होरी का कुछ भी है.अब वो मजदूर है यहाँ तक की घर भी रेहन पर है और एक बेटी की शादी भी करनी रहती.इस गरीबी और जिम्मेदारी ने उसे तोड़ दिया है.वह उम्र से पहले ही बुढा हो जाता है.उसका एक सपना रहता है कि वह एक गाय खरीदे.अपने दरवाजे पर गाय बंधी हो इसका सपना वह हमेशा देखता रहा.और यह सपना, सपना ही रह जाता है.उसे अपनी बेटी की शादी उम्रदराज आदमी से करना पड़ता है जिसके कारण वह अंदर ही अंदर टुट जाता है.गोबर अब बदल गया है है और अब वह अपने माँ बाप की इज्जत करने लगता है.गोबर के बेटे के दुध के लिए होरी गाय खरीदना चाहता है और इसलिए वह रात में भी काम करता है.
एक दिन खेत में ही होरी की मजदूरी करते हुए हीं मौत हो जाती है.सभी धनिया से गोदान(गाय दान करना ) करने को कहते हैं तो वह गाय खरीदने के लिए जो पैसे इकठ्ठे कर रहे होते हैं उन्हें होरी के हाथों पर रख कर कहती है कि यही उनका गोदान है और पछाड़ खा कर गिर जाती है.
गरीबी, लाचारी, विवशता, मानसिक वेदना, इन सब को प्रेम चंद्र ने इतने खुबसुरत तरह से ब्यां किया है जिसका जवाब नहीं है.इस उपन्यास में उन्होंने स्त्री को पुरुष से श्रेष्ठ बताया है प्रेम इतना खुबसुरत वर्णन किया है.जीवन के प्रत्येक हिस्से को उन्होंने इस उपन्यास में छुआ है.शायद इसलिए ही "गोदान" विश्व की महानतम उपन्यासों में से एक है.तो अगर आपको समय मिले तो इसे जरूर पढ़ें 😊
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