गोदान 2
हाय, मैं आ गई गोदान को लेकर 😊तो चले जादूई लेखनी से रुबरु होने.
आपने पिछले अंक में देखा की किस तरह एक गरीब किसान रिती रिवाज, सामाजिक बेडियो में जाता हुउ पिसता रहता है.एक किसान जो पौ फटते ही काम पर लग जाता है और रात गए तक लगा रहता है उसे अन्य सुविधाओं तो छोडे दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती थी.और दूसरी ओर जमींदार और अंग्रेज अय्याशी भरी जिंदगी बिताते थें.इन सब के साथ ही महान कथाकार प्रेम चंद जी ने हर एक रिश्ते का बहुत ही खुबसूरती से वर्णन किया है.मनोदशा का इतना इतना सजीव चित्रण की कोई भी नि:शब्द रह जाए . मैं तो यह दावे के साथ कहती हूँ कि इतनी बेहतरीन मनोदशा का वर्णन कोई नहीं कर सकता.
गोबर शहर भागकर मिर्जा साहब के यहाँ काम करने लगता है.मिर्जा साहब मस्तमौला इन्सान हैं.वो अक्सर कुछ न कुछ नया करते रहते हैं.जैसे सभी बेरोजगार मजदूरों का कब्बडी का आयोजन.खेल का खेल और खेल के अंत में मजदूर भी.यही उनके दोस्त इक्कठे होतें है राय साहब, मेहता साहब, खन्ना, मालती, मिस्टर तंखा, संपादक ओंकरनाथ.यहाँ फिलसफर मेहता साहब के प्रति डाक्टर मालती आकर्षित है लेकिन मेहता साहब को उनसे लगाव नहीं है.और मिलों के मालिक विवाहित खन्ना साहब मालती मालती से आकर्षित हैं मालती को लेकर उनकी पत्नी गोविन्द से झगड़ा होते रहता है.एक बार बात यहाँ तक पहुँच जाती है कि खन्ना साहब की पत्नी घर छोड़ कर चल देती है.लेकिन रास्ते में उसे मेहता मिल जातें हैं जो उसे समझा कर घर पहुँच देते हैं और ये वादा करते हैं कि वो मालती को खन्ना से दूर कर के रहेंगे.
इधर गोबर ठेला लगाने लगता है.अब उसके पास पैसे हो गए हैं.वह गाँव जाता है और अपने किए की माफ़ी मांगता है.उसमें घमंड हो गया है वह किसी की बेइज्जती कर देता है.माँ बाप से लडकर गोबर अपनी पत्नी झुनिया को लेकर शहर चला आता है . अब वह अपने काम पर उतना ध्यान नही देता है नतीजन पैसों की कमी के कारण पति पत्नी में झगड़े होने लगतें है ंं.एक झगड़े में गोबर को बहुत मार पडती है.तब उसकी पत्नी झुनिया उसकी देखभाल करती है और पैसे भी कमा कर लाती है.
गांव में गोबर की बहन सोना का विवाह ठीक होता है.दहेज के रूपये के लिए ब्याज पर गोबर का पिता कर्ज लेता है. इसके साथ ही सिलीया चमारीन की भी कहानी चलती है जो एक पंडित की रखैल है.दिनभर काम और अपना शरीर देने के बावजूद भी उसे दो वक्त का खाना सिर्फ मिलता है.जिस वह प्यार समझती है वह पंडित के लिए सिर्फ सौदा है.आखिरकार उसे पंडित से अलग होना पड़ता है.उसे एक बच्चा होता है.जिसे लेकर वह हमेशा रोती रहती है क्योंकि प्रेम पर कर वह माँ बाप को पहले ही त्याग चुकी है और अब प्रेमी ने भी छोड़ दिया.एक दिन तबियत खराब होने से उसके बच्चे की मौत हो जाती है तब पंडित आता है और शव को लेकर जाता है.फिर पंडित चमारीन सिलिया को अपना लेता है और अपनी जात, जनेऊ उतार फेकता है.
बाकी अगले अंक में 😊
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