कर्मभूमि - प्रेम चंद-1
कलम के जादूगर प्रेम चंद जी की कालजयी रचनाओं में से एक है 'कर्मभूमि'. इस उपन्यास में प्रेम पर बहुत विस्तार से लिखा है.बहुत रोमांटिक है यह उपन्यास... प्यार से सराबोर.लेकिन प्यार कब , कैसे परिस्थितियों के वश बदल जाता है यह भी बहुत खूब दर्शाया है इन्होंने.इसकी कहानी पाठक को अपने पास पडोस जैसी ही लगेगी. बचपन की जो चर्चा इन्होंने नायक द्वारा की है वह उनके अपने जीवन का ही भाग है.तो आईए ले चलुं रुहानी दुनिया में ☺
कहानी में मुख्य नायक अमरकांत है.उसका दोस्त सलीम, उसकी पत्नी सुखदा, बहन नैना, पिता समरकांत, प्रेमिका सकीना, शिक्षक शान्ति कुमार आदी कहानी के मुख्य पात्र हैं. कहानी अंग्रेजो के समय की है.
कहानी अमरकांत के विद्यालय से शुरू होती है.जहाँ उसके पास जमा करने के लिए रुपये नहीं है.तो वह बाहर जा कर छुपकर रोता है तब सलीम उसके पैसे जमा कर देता है.सलीम बहुत अच्छा शायर है और वह अपनी शायरी अमरकांत को सुनाता है और वह हमेशा वाहा वाही कर के उसका मनोबल बढाता है.
"आपको मेरी वफ़ा याद आयी,
खैर है आज यह क्या याद आयी."
"फिर मेरे सीने में एक हूक उठी,
फिर मुझे तेरी अदा याद आयी."
इस तरह सलीम खूब मजे से शायरी सुनाता है.अमरकांत के बचपन में ही उसकी माँ का देहांत हो गया.सौतेली माँ उसे हमेशा डाटती है, पिता भी ध्यान नही देते उसपर. इस तरह वह माँ बाप दोनों से नफरत करने लगता है.लेकिन उसकी सौतेली बहन से उसे बहुत प्यार है वह भी उसे प्यार करती है.अमरकांत का विवाह सुखदा नाम की धनी परिवार की एकलौता लड़की होता है.लेकिन दोनों का प्यार नहीं है.दोनों की सोच अलग है. उसे एक बेटा होता है.अमरकांत देश सेवा, जन सेवा करता है और पढाई.वह पिता के काम में जरा भी मदद नहीं करता है जिसे लेकर उसका और उसके पिता के बीच हमेशा झगड़ा होता है. इसमें उसकी पत्नी भी उसका ही दोष मानती है.
अमरकांत का मन घर
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