गोदान
गोदान विश्व की महान कालजयी रचना है. इसे कम शब्दों में बांधना गागर में सागर भरने जैसा है.लेकिन फिर भी मैं आपको के लिए इससे करने की पुरी कोशिश करुंगी.
गोदान मुलतः किसानों की कथा है.ये उस समय की बात है जब भारत गुलाम था और पुरा भारत जमींदार में बंटा था.ये जमींदार जबरदस्ती लगाने वसूल कर अंग्रेजो को भरते थें.उस समय किसानों की हालत बहुत दयनीय थी. दिन भर की देह तोड़ काम करने के बावजूद भी दो वक्त का खाना भी नहीं मिल पाता था. चारों तरफ विपन्नता का राज था.
गोदान के मुख्य पात्र क्रमशः होरी, गोबर, धनिया, झुनकी,मेहता साहब, मालती, खन्ना, राय बहादुर हैं. कहानी के मुख्य पात्र होरी सारी जिन्दगी पिसता रहता है. अपने घरवालों का पेट काट कर वो जमींदार रायबहादुर को लगाने देता है . लगाने भरने के बावजूद भी वह जमींदार का बे दाम का गुलाम है.ये बात उसकी पत्नी धनिया को नहीं पचती.लगान भरने के बावजूद भी जमींदार की गुलामी के खिलाफ वह अपने पति होरी से लडती है. परिवार के टुटने और बिखरने का इतना सजीव चित्रण आज तक किसी ने नहीं किया हो.
सबसे बड़ी बात कितनी भी विपत्ति आने के बावजूद भी होरी का भगवान से लगाव कम होने के बजाय बढते जाता है.इस बीच होरी का बेटा गोबर जिसकी शादी गरीबी के कारण नहीं हो पा रहा है वो दुसरी जाती की लड़की झुनिया से प्यार करने लगता है और जब वह गर्भवती होती है तो गोबर डर कर भाग जाता है.आखिर कार होरी और धनिया उसे बहु के रूप में घर में रख लेते हैं.और खामियाजे के रुप में उन्हें अपना सारा आनाज और घर रेहन पर रख देता है....... बाकी अगले पन्ने में 😊
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